एक शिक्षक और एक गरीब छात्र की प्रेरणादायक कहानी

वैसे तो मैंने ये कहानी  मैंने 8th standard में मेरे टीचर से सुना था जिसे इंटरनेट पर दोबारा पढ़कर उस समय के वो sentimemts वो आदरभाव, वो प्रेरणा जो इस कहानी को सुनने के बाद जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए मिली  उन पुराणी यादो के साथ ताजा हो गयी, सुमहरी हो गयी तो सोचा क्यों ना इसे  अपने ब्लॉग पर साझा कर दूँ।  तो आनंद लीजिये इस कहानी का जो अपने आप में एक बड़ी सीख लिए  हमे एंटरटेन करेगी। ....


बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर क्लास चल रही थी, तभी टीचर ने बच्चों से पूछा कि अगर तुम सभी को 100-100 रुपये दिए जाए तो तुम सब क्या क्या खरीदोगे ? किसी ने कहा कि मैं वीडियो गेम खरीदुंगा l


किसी ने कहा मैं क्रिकेट का बेट खरीदुंगा l किसी ने कहा कि मैं अपने लिए प्यारी सी गुड़िया खरीदुंगी, तो किसी ने कहा मैं बहुत सी चॉकलेट्स खरीदुंगी l एक बच्चा कुछ सोचने में डुबा हुआ था l

टीचर ने उससे पुछा कि तुम क्या सोच रहे हो ? तुम क्या खरीदोगे ? बच्चा बोला कि टीचर जी, मेरी माँ को थोड़ा कम दिखाई देता हैं तो मैं अपनी माँ के लिए एक चश्मा खरीदूंगा ‌l

टीचर ने पूछा, तुम्हारी माँ के लिए चश्मा तो तुम्हारे पापा भी खरीद सकते हैं, तुम्हें अपने लिए कुछ नहीं खरीदना? बच्चे ने जो जवाब दिया उससे टीचर का भी गला भर आया l बच्चे ने कहा कि मेरे पापा अब इस दुनिया में नहीं है l

मेरी माँ लोगों के कपड़े सिलकर मुझे पढ़ाती हैं और कम दिखाई देने की वजह से वो ठीक से कपड़े नहीं सिल पाती हैं इसीलिए मैं मेरी माँ को चश्मा देना चाहता हुँ ताकि मैं अच्छे से पढ़ सकूँ, बड़ा आदमी बन सकूँ और माँ को सारे सुख दे सकूँ l

टीचर ने कहा, बेटा तेरी सोच ही तेरी कमाई हैं l ये 100 रूपये मेरे वादे के अनुसार और ये 100 रूपये और उधार दे रहा हूँ l

जब कभी कमाओ तो लौटा देना l और मेरी इच्छा है तू इतना बड़ा आदमी बने कि तेरे सर पर हाथ फेरते वक्त मैं धन्य हो जाऊं l 15 वर्ष बाद l

 बाहर बारिश हो रही हैं l अंदर क्लास चल रही हैं l अचानक स्कूल के आगे जिला कलेक्टर की बत्ती वालीगाड़ी आकर रूकती हैं l

स्कूल स्टाफ चौकन्ना हो जाता हैं l स्कूल में सन्नाटा छा जाता हैं l  मगर ये क्या? जिला कलेक्टर एक वृद्ध टीचर के पैरों में गिर जाते हैं और कहते हैं " सर मैं दामोदर दास उर्फ़ झंडू l

आपके उधार के 100 रूपये लौटाने आया हूँ "पूरा स्कूल स्टॉफ स्तब्ध l वृद्ध टीचर झुके हुए नौजवान कलेक्टर को उठाकर भुजाओं में कस लेता है और रो पड़ता हैं l

हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते हैं और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख  देंगे।

मेरे गुरु में मुझसे कहा था की ज्ञान हमे जहा से मिले जैसे मिले ज्ञान देने वाला हमारा गुरु है हमारा टीचर है चाहे वह कोई वृद्ध जन हो या चाहे वह एक छोटी सी चींटी ही क्यों ना हो उससे भी हमे सिख मिलती है कई असल्फताओ के बाद भी निराश नही होना चाहिये।

कुछ बाते सामान्य होती है लेकिन संजीदगी से उन्हें समझने पर उनका असर बड़ा होता है। अच्छी चीजे शेयर करना चाहिये।  हो सकता हैं ये कहानी आप पहले भी कई बार सुन चुके हो। लेकिन दोबारा पड़ लेने में क्या है  अच्छी बाते बार बार सुननी चाहिए क्या पता कब दिमाग में असर हो जाये और वही से नए बदलाव की।शुरआत हो जाय।



सभी शिक्षकों को सादर समर्पित! 💐

🙏🙏🙏

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